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आधुनिकता का लबादा: प्रभुत्व एवं प्रतिरोध का द्वन्द्वात्मक विमर्श

अनिवेद, शिवनारायण सिंह

FormatEbook
Published2001
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
‘भ्रान्त आधुनिकता’ और ‘भारतनामा’ शीर्षक दो पुस्तकों की समीक्षा करते हुए यह लेख भारत के सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक परिवर्तनों पर चर्चा करता है। उपनिवेश रह चुके भारत जैसे देशों में पूंजी का अभाव उनके सामाजिक ढांचे को प्रभावित करता है और उनकी आधुनिकता का स्वरूप भी निर्धारित करता है। लेखक का मानना है कि भारत बहुल आधुनिकताओं वाला देश है जहाँ एक ही साथ आधुनिक राजनैतिक-आर्थिक व्यवस्था भी मौजूद है और उत्तर-सामन्ती संस्कृति भी।

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