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देखना सीखना, इन्द्रियों को जगाना

, जिनान

FormatEbook
Published2013
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
लेख संस्कृतियों व रचनात्मकता पर वर्तमान स्कूलिंग व्यवस्था के कारण पड़ने वाले दुष्प्रभावों को प्रस्तुत करता है। यह कला से जुड़े बुनियादी प्रश्नों को उठाता है और उनकी व्याख्या करता है। पश्चिम की नक़ल का प्रभाव और आदिवासी जनजातीय समूह की जीवन शैली व उनकी कला पर विचार करते हुए कलाओं के मूल रूप व उनकी ताक़त को प्रस्तुत करता है। स्कूल की पाठ्यचर्या को बदलने में कला की ताक़त को रेखांकित करते हुए कला की अनुभूति, सौन्दर्य व स्वरूप की समझ को प्रस्तुत करता है।

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