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आख़िर बालक कौन' : क़ानूनी उलझनें और बच्चों का भविष्य

शर्मा, कंचन

FormatEbook
Published2014
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख भारत में बच्चों को परिभाषित करने की उलझनों को रेखांकित करता है। लेख विस्तार से बताता है कि बाल विवाह निषेध क़ानून, जनगणना, बाल मज़दूर प्रतिबन्ध क़ानून, संयुक्त राष्ट्र संघ की बाल अधिकार संविदा आदि बच्चे को अलग-अलग तरह से परिभाषित करते हैं। लेख देश के भीतर विभिन्न किस्म के समुदायों, संस्कृति में बच्चे की अलग-अलग परिभाषाओं और उनसे उत्पन्न होने वाली जटिलताओं की ओर भी इशारा करता है। लेख बताता है कि बालक को परिभाषित करने वाले अलग-अलग नियामकों के कारण शिक्षा और बाल अधिकारों के संरक्षण में मुश्किलें बढ़ जाती हैं।

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