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खेलो, प्यार से

आयंगर, उषा मुकुन्दा नी

FormatEbook
Published2013
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy $1
About this book
लेख में लेखिका इस बात की ओर ध्यान दिलाती हैं कि छोटी उम्र में बच्चों के लिए खेलना तत्काल अन्दर से उठने वाला उल्लास से भरा शारीरिक मनोरंजन एवं आनन्द का जज़्बा होता है, जबकि बड़े होने पर पदक, पुरस्कार, प्रसिद्धि मायने रखने लगते हैं। साथ ही वे शारीरिक गतिविधियों और खेलों में आनन्द की बात करते हुए खेल के मैदान में प्रतिस्पर्धा की भूमिका, अध्यापकों, अभिभावकों एवं कोच की भूमिका, कोचिंग आदि पहलुओं पर अपने विचार साझा करती हैं। इसके मार्फ़त वे स्कूलों में खेले जाने वाले खेलों को अधिक आनन्दायी और समावेशी बनाने का आग्रह करती हैं।

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