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नन्दिनी का स्कूल

बाजपेई, कमला

FormatEbook
Published2020
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
स्कूल बच्चों के जीवन में अनायास आया हुआ हस्तक्षेप है, जो अगर बहुत सोचा-परखा, सुनियोजित व संवेदनशील न हो तो उनके शुरुआती दिनों को असहज बना सकता है। बच्चों का शुरुआती जीवन सीखने और समझ बनाने के एक सहज प्रवाह की तरह होता है। उसमें आसपास अवलोकन; आपसी अनौपचारिक बातचीत; मौलिक अभिव्यक्ति और सामूहिकता के लिए पर्याप्त अवसर होने बहुत ज़रूरी हैं। स्कूल में नन्दिनी की असहजता के उदाहरण से, लेखिका प्राथमिक स्कूल में सीखने-सिखाने के तौर-तरीक़ों और शिक्षक की तैयारी पर रोशनी डालती हैं।

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