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सीखने के बारे में
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About this book
यह लेख बताता है कि सुधार और क्रान्ति मानवीय मुश्किलों को हल करने की बजाय स्थिति को और ज़्यादा उलझा देती हैं। इसीलिए शिक्षा के ज़रिए मानवीय मन में मौलिक क्रान्ति की ज़रूरत है। यहाँ सीखने का मतलब स्मृति विकास या मन को सूचनाओं से भर देना नहीं बल्कि ज्ञान और समझ से है जिसमें स्व के बारे में ज्ञान भी शामिल है जो प्रलोभन या ज़बरदस्ती हासिल करना सम्भव नहीं है बल्कि मनोयोग से आता है। यह मनोयोग तभी सम्भव है जब मानव मन भय और ज़ोर-ज़बरदस्ती से मुक्त हो। इसलिए कृष्णमूर्ति मानवीय स्वतंंत्रता को सबसे अधिक तव्वजो देते हैं और कहते हैं कि असली सीखना केवल आन्तरिक और बाहरी स्वतंंत्रता की स्थिति में ही सम्भव है। वह पारम्परिक विचारों जैसे कि अनुशासन और तुलना करने की प्रवृत्ति को ख़ारिज करते हैं और इसकी अपेक्षा मनुष्य के समग्र विकास पर ज़ोर देते हैं।
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