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सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा को केन्द्र में रखना : अज़ीम प्रेमजी स्कूल कलबुर्गी
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About this book
लेख स्कूल में बच्चे के सामाजिक और भावनात्मक विकास के लिए पर्याप्त समर्थन और अवसर की उपलब्धता को सन्दर्भित करता है। इस हेतु लेखिका बतलाती हैं कि किस प्रकार सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा में कई पहलू यथा- आत्मभान, आत्म प्रबन्धन, ज़िम्मेदार निर्णय आदि में दक्षता विद्यार्थियों को नैतिक और तर्कसंगत बनाती है। साथ ही वे अपने स्कूल में सीखने के एक सकारात्मक और सहयोगी माहौल का बढ़ावा देने और आवश्यक संसाधन देने के ज़रिए विद्यार्थियों में सामाजिक-भावनात्मक कौशल विकसित होने के अनुभव साझा करती हैं।