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यदि हमारी मंजिल शिक्षकों की मुक्ति है तो वहाँ तक पहुँचने का एक प्रमुख मार्ग मननशील अभ्‍यास है

गर्ग, कुलदीप

FormatEbook
Published2018
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख बताता है कि जब तक शिक्षक आगे बढ़कर व्यावसायिक आवश्यकताओं को सीखने और अपने विकास की ज़िम्मेदारी ख़ुद नहीं उठाते, तब तक सिर्फ़ बाहरी संस्थाओं के सहयोग से विद्यालय में स्थायी शैक्षिक परिवर्तन लाना सम्भव नहीं हो पाता। इसी सन्दर्भ में लेखक ने दिगन्तर संस्थान की एक परियोजना के अपने अनुभवों, प्रक्रियाओं और निष्कर्षों को साझा किया है। जब शिक्षक स्वयं ही अपने समूह में चिन्तन-मनन करने तथा पोर्टफोलियो लेखन की प्रक्रिया नियमित रूप से शुरू कर देते हैं, तब बिना किसी बाहरी सहायता पर निर्भर हुए शैक्षिक परिवर्तन की यह प्रक्रिया भी स्वयं आगे बढ़ने लगती है।

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