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आज़ादी का मर्म
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About this book
यह लेख बताता है कि आज़ादी आन्तरिक विचार है, न कि बाहरी परिस्थिति। वास्तविक आज़ादी मन और आत्मा की होती है। लेख स्पष्ट करता है कि राजशाही की तरह वर्तमान युग भी षड्यंत्रों से व्याप्त है और लोग यह मानकर खुश हैं कि वे स्वतंत्र हैं। इसमें पश्चिम और भारत की वर्तमान परम्पराओं और वास्तविक आज़ादी पर उनके प्रभावों का जिक्र है। अन्त में लेख बताता है कि पश्चिम ने आध्यात्मिक नियंत्रण और भारत ने जीवन शक्ति की उपेक्षा की है।