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भारतीय भाषाएँ विकासशील समाज में पहचान का माध्यम

सिंह, अंजनी कुमार

FormatEbook
Published2009
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
इस लेख के माध्यम से लेखक विभिन्न भारतीय भाषाओं के उनके समुदायों के साथ सम्बन्ध की चर्चा करते हैं। साथ ही वे यह भी रेखांकित करते हैं कि भारतीयों में भाषा के प्रश्न पर असीम सहिष्णुता है जिस कारण सभी भाषाएँ जीवित हैं। वे विभिन्न समुदायों एवं उनकी भाषाओं और बोलियों के सन्दर्भ में जनगणना में एकत्र आँकड़ों के साथ विविध तथ्यों को पेश करते हुए विश्लेषण करते हैं। उनके अनुसार विभिन्न समुदाय भाषा और बोलियों का प्रयोग न सिर्फ़ अपने आपको एक सूत्र में पिरोने के लिए बल्कि अपनी सामुदायिक विशिष्टता और अपनी भाषायी पहचान बनाए रखने के लिए करते हैं।

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