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गांधी का कर्मबोध

सन्त, किशोर

FormatEbook
Published2012
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
गांधी कर्म जनसाधारण अनुशासन एवं बोध पर आधारित था। हमारे सामने प्रश्न यह है कि क्या यह धर्म और नीति बोध,लालसा से प्रेरित हिंसक औद्योगिक-सभ्यता के आक्रमण के सामने टिक पाएगा। क्या मानवता की नैतिक और आध्‍यात्मिक शक्ति इस विनाशक प्रवाह को रोक पाएगी या वह स्वयं इसका शिकार हो जाएगी। लेखक इन सवालों के इर्द-गिर्द गांधी कर्म को सामने रखते हुए जवाब खोजने की कोशिश इस लेख में करते हैं। गांधी कर्म सुझाता है कि व्यक्ति को भोगवादी संस्कृति का त्याग करते हुए मानवता और सृष्टि के लिये बेहतर मूल्यों का सृजन करना चाहिए।

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