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लिखना मौत से लड़ना जैसा है

गालिआनो, एदुआर्दो

FormatEbook
Published2012
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
‘कोई लेखक किसके लिए लिखता है?’ यह कोई नया सवाल नहीं है, लेकिन इसके समय, समाज और विचारधारा के अनुसार कई जवाब हो सकते हैं। लेख में लातिन अमरिकी देशों के परिप्रेक्ष्य में इस सवाल का जवाब देने की कोशिश की गई है, जहाँ सैनिक तानाशाही, अमीरी-ग़रीबी के बीच बढ़ती खाई, शिक्षा का हद से अधिक महँगा होना और किताबों के ख़रीदने की शक्ति का पूर्णतः लोप हो चुका है। ऐसे में जिन्हें जगाने और अधिकारों से परिचय करवाने के लिए लिखा जा रहा है, क्या वे इस लिखे को पढ़ पा रहे हैं? लेख अपने को पाठक से अलग मानने की भी मुख़ालिफ़त करता है और लेखक को समाज का अभिन्न अंग मानते हुए विकट परिस्थितियों में भी लिखते रहने के लिए प्रेरित करता है।

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