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राजपूत और मुग़ल : सम्बन्धो का आकलन - देशज इतिहासकारों की दृष्टि में
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About this book
इस लेख में राजपूत-मुग़ल सम्बन्धों पर इतिहासकारों के बीच उभरती बहसों का लेखा-जोखा पेश किया गया है। कई इतिहासकारों ने इन बहसों की आड़ में भारतीय इतिहास के मध्यकाल को पुनर्व्याख्यायित करने की कोशिशें कीं, जिससे समकालीन उपमहाद्वीप में सामाजिक-राजनीतिक सम्बन्धों में दरारें लाकर इतिहास के माध्यम से साम्प्रदायिक रंगत देने के प्रयास साफ़ नज़र आते हैं। औपनिवेशिक काल से उपजी इतिहास लेखन की इस पद्धति का कई इतिहासकारों ने जहाँ सामना किया, वहीं अन्ध-राष्ट्रवाद की विचारधारा के पोषण में इतिहास लेखन की पद्धति को सहायक भी बनाया गया। इससे जुड़ी समस्याओं और समाधानों की चर्चा इस लेख में की गई है।
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