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नाटकीय खेल और भाषा का विकास

बास्रि, मेघना

FormatEbook
Published2022
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख बच्चे की प्रथम भाषा (घर की भाषा) और द्वितीय भाषा (पढ़ाई के दौरान उपयोग में ली जाने वाली भाषा) में खेल के महत्त्व के बारे में बात करता है। लेख में घर में सामान्य रूप से खेले जाने खेलों के माध्यम से बच्चों द्वारा सहज रूप से प्रथम भाषा में महारत हासिल कर लेने के विभिन्न उदाहरण दिए गए हैं। साथ ही द्वितीय भाषा में भी बच्चे इस स्तर को हासिल कर पाएँ, इस हेतु लेखिका भाषा की कक्षाओं में रोल-प्ले/ नाटकीय खेलों को अपनाने की विभिन्न सम्भावनाओं को तलाशने की सिफ़ारिश करती हैं।

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