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ज्ञान का स्वरूप

प्रिचर्ड, डंकन

FormatEbook
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख ज्ञान और उसकी प्रामाणिकता की समस्या की पड़ताल करता है। यह विभिन्न तुलनाओं के माध्यम से प्रामाणिकता की संरचना से सम्बन्धित समस्या पर प्रकाश डालता है, जिसे अगरिप्पा की त्रिविधा कहा जाता है। अन्त में यह ज्ञानमीमांसीय सिद्धान्त के तीन प्रकारों— अनन्तवाद, सुसंगततावाद और आधारवाद की संक्षिप्त व्याख्या करता है, जो अगरिप्पा की त्रिविधा के प्रत्युत्तरों के तौर पर कार्य करते हैं।

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