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Cover of राह ‘प्रजातंत्र’ से जनतंत्र की

राह ‘प्रजातंत्र’ से जनतंत्र की

जोशी, प्रज्ञा

FormatEbook
Published2008
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
लेख बताता है कि जनतंत्र निर्माण के लिए राज्य द्वारा भौतिक संसाधनों का सार्वभौमिकीकरण किया जाना चाहिए। किन्तु इसके उलट राज्य भौतिक संसाधनों पर ख़ुद ही कब्ज़ा कर लेता है। इसका परिणाम यह होता है कि भौतिक संसाधनों से वंचित जनता के लिए सामुदायिक पहचान ही प्रमुख बन जाती है। इसे बचाए रखने के लिए व्यक्ति और विशेषकर महिलाओं की स्वतंत्र गतिशीलता पर अंकुश लगाया जाता है। यह प्रक्रिया जाति और कर्मकाण्डों के रूप में अन्ततः सामाजिक भेदभाव को ही बढ़ावा देती है। इसलिए एक सफल जनतंत्र के लिए राज्य को जनसहभागिता की पहल करनी चाहिए।

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