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ज़रूरत है : कल्पनाशील नेतृत्व, संघर्ष और निर्माण की

जोशी, रामशरण

FormatEbook
Published2004
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
मण्डल आयोग की सिफ़ारिशों को लागू किए जाने के बाद हिन्दी पट्टी में दलितों और पिछड़ों में अस्मिता का तीव्र उभार हुआ तथा उनके बीच अन्तर्विरोध भी पैने हुए। उनके अभिजन वर्ग में सत्ता पाने की ललक तो बढ़ी लेकिन सामाजिक बदलाव की बजाय उसने मनुवादी संस्कृति के अनुकरण का रास्ता चुना। उत्पीड़ित वर्गों का साझा मोर्चा बनाने और समानान्तर वैकल्पिक संस्कृति के निर्माण पर लेख ज़ोर देता है।

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