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दलित व्यथा का यथार्थ

सौभाग्यवती,

FormatEbook
Published2001
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
दलितों के लिए अम्बेडकर के प्रयासों और आरक्षण की चर्चा करते हुए लेख वर्णव्यस्था को ख़त्म करने के लिए और प्रयासों की ज़रुरत पर ज़ोर देता है। सामाजिक न्याय की लड़ाई के लिए लेखिका सभी जातियों के ग़रीब और उत्पीड़ित लोगों को साथ लेकर चलने की हिमायत करती है। दलित उत्पीड़न का इतिहास बताने की ओर इशारा भर कर लेखिका उनकी वर्तमान स्थिति और दिनोंदिन दलितों पर बढ़ते अत्याचारों के कई उदाहरण पेश करती हैं। लेख में दलितों के धर्मान्तरण के सच को भी कई कोणों से पेश करने का प्रयास किया गया है।

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