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सामाजिक दायरे के तौर पर स्‍कूलों को नया आकार देना

शुक्‍ला, सुबीर

FormatEbook
Published2022
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख उत्तर प्रदेश में लेखक और एक शिक्षक के बीच एक संवाद के बाद की चर्चा को प्रस्तुत करता है। शिक्षक का मानना था कि स्कूल इस बात में निहित है कि शिक्षक और बच्चों के बीच क्या होता है यानी एक सामाजिक रचना। आगे स्कूल के 'सामाजिक दायरे' और सामाजिक भूमिका का महत्त्व और स्कूल फिर से खुलने से पहले और तु्रन्त बाद की जाने वाली कुछ सामाजिक कार्रवाइयाँ दी गई हैं। एनईपी 2020 के अनुरूप स्कूलों को नए आकार में ढालने के अर्थ को तीन चरणों में समझाया गया है।

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