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पाठ्यपुस्तकों के बोझ तले सिसकती रचनात्मकता

पुनेठा, महेश

FormatEbook
Published2013
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
रचनात्मकता के विकास के लिए कार्य करने की स्वतंत्रता,अवसर की उपलब्धता तथा चुनौती का होना आवश्यक है। अनेक अध्ययनों में पाया गया है कि जब-जब बच्चों को स्वतंत्रता मिली है, उन्हें कुछ करने के अवसर दिए तथा उनके सामने चुनौती प्रस्तुत की गई, तब-तब उनमें रचनात्मकता का विकास हुआ। लेकिन स्कूल में पाठ्यपुस्तक का बोझ बच्चों की इस रचनात्मकता को उभरने ही नहीं देता है। इस लेख में लेखक ने इस मुद्दे पर विस्तार से बात की है।

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