HomeEducation › जैव-बहुलक कितने कड़क, कितने लचीले?

Cover of जैव-बहुलक कितने कड़क, कितने लचीले?

जैव-बहुलक कितने कड़क, कितने लचीले?

सिन्हा, सुपुर्णा

FormatEbook
Published2012
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
हमारे शरीर के ढ़ाँचे में कुछ संरचनाएँ कठोर हैं तो कुछ लचीली। हमारा कंकाल ठोस हड्डियों का बना है इसलिए वह लचीला नहीं है लेकिन मांसपेशियों के अन्दर एक्टिन तन्तुओं की नरम, लचीली परतें होती हैं, जो मुड़ सकती हैं। शरीर के अलग-अलग भाग अलग-अलग तरह के बहुलकों से बने होते हैं और इसीलिए इनका लचीलापन भी अलग-अलग होता है। कुछ बहुलक सुई की तरह कड़क होते हैं तो कुछ धागे की तरह लचीले और कुछ न बहुत कड़क और न ही बहुत लचीले। ये सारे बहुलक हमारे जीवन के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण होते हैं।

More in Education

Browse all →