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स्कूल के सवाल ज़िन्दगी के सवालों से फ़र्क क्यों?

यशपाल, प्रोफे़सर

FormatEbook
Published1997
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
इस लेख में स्कूल में विज्ञान पढ़ाए जाने के तरीक़ों को चर्चा की गई है। रोज़ाना की ज़िन्दगी से जुड़े सवालों को स्कूल की पढ़ाई से अलग कर पढ़ाई को विषयों के दायरे में बान्ध कर रख दिया है। पढ़ने का उद्देश्य केवल नम्बर लाना है। जब भी शिक्षा को सुधारने के लिए कोई नई संस्‍था बनाते हैं तो नए प्रतिबन्ध आ जाते हैं। अगर पढ़ाई का ज़िन्दगी से ताल्‍लुक़ न हो तो आविष्‍कारक बनना कठिन है। गाँवों में कितने नवाचार/जुगाड़ करते हैं लोग। शिक्षा के इस सिस्‍टम और अपने नए सिस्‍टम को साथ लेकर चलना चाहिए। लेखक ने भारत में शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी समस्याओं पर भी अपने विचार रखे हैं।

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