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तितलियों में रंग मज़ेदार

जोशी, सुशील

FormatEbook
Published2001
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
इस लेख में तितलियों के आकर्षक रंगों के माध्यम से लेखक द्वारा किसी भी जीव/पदार्थ के रंगीन दिखाई देने के कारणों का विश्लेषण किया गया है। लेखक के अनुसार बहुत सारे मामलों में यह रंग उनमें उपस्थित रंजकों के कारण होता है। रंजकों की रासायनिक बनावट की वजह से वे किन्हीं खास रंग की किरणों को सोख पाते हैं व परावर्तित किरणों की वजह से हमें पदार्थ या जीव रंगीन नज़र आते हैं। परन्तु साबुन के बुलबुलों या आकाश के रंगों जैसे उदाहरणों में रंग रंजकों से बने हुए नहीं होते हैं। इन उदाहरणों में यह रंग पदार्थ की भौतिक बनावट के कारण दिख रहे होते हैं।

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