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आसमान तो था, लेकिन ज़िन्दगी नदारद थी

नोतानी, मनोहर

FormatEbook
Published1995
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
जीवन की उत्पत्ति सम्बन्धी अनुसन्धान से जुड़े वैज्ञानिकों के एक तबक़े के मुताबिक आज से क़रीब तीन सौ करोड़ साल पहले आसमान कमोबेश वैसा ही था जैसा आज है। अलबत्ता उसमें छितरी विभिन्न गैसें फिज़ा में समा रही थीं। ज़हरीली न होकर वायुमण्‍डल में मीथेन थी, हाइड्रोजन थी और अमोनिया की कुछ वाष्प थी। लेकिन ज़िन्दगी नदारद थी। प्रस्तुत लेख में पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति को इन्‍ही सब तथ्‍यों के आधार पर चर्चा की गई है।

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