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सामाजिक न्याय और आत्मबल

बोर्दिया, मंजुला

FormatEbook
Published2001
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
संविधान में स्त्रियों को समान अधिकार मिलने के 50 वर्षों बाद भी स्त्रियों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं आया। लेखिका का मानना है कि स्त्रियों के अन्दर कठिन परिस्थितियों से लड़ सकने की एक आध्यात्मिक आन्तरिक शक्ति है, जिसे विकसित करना चाहिए। इस आन्तरिक शक्ति के उदाहरण के लिए लेखिका सीता, द्रौपदी और सावित्री का उल्लेख करती है और नारी सशक्तीकरण के लिए इस शक्ति के संचार को ज़रुरी मानती हैं।

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