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नारीवाद की भारतीयता : आयाम अस्मिता और अन्तरंगता

तिलक, रजनी

FormatEbook
Published2017
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
इस परिचर्चा में भारतीय नारीवाद से सम्बन्धित कई मुद्दों पर नारीवादी विदुषियों के साथ चर्चा की गई है। परिचर्चा में भारतीय नारीवाद की तलाश और उसके इतिहास को खँगालने के प्रयास देखे जा सकते हैं। यहाँ पश्‍चिम के नारीवाद से ग्रहण करते हुए अपने अतीत में संघर्षों की जड़ें तलाश की गई हैं। मुद्दों को नितान्त निजी न बनाते हुए नारीवाद पर भारतीय परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करते हुए वक्ता इसके सार्वभौमिक बनाने पर भी ध्यान देते हैं। यहाँ राष्ट्रवाद की संकुचितता में स्त्रियों के वैश्‍विक परिदृश्य को भी ध्यान में रखा गया है। यह परिचर्चा नारीवाद के इतिहास बनाने और जानने का बेहतरीन ज़रिया है।

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