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काम ही काम, नहीं खेल का नाम...

अशोक, कल्याण

FormatEbook
Published2013
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy $1
About this book
लेख बच्चों के विकास में खेल और क्रीड़ा की महत्त्वपूर्ण भूमिका के बारे में बात करता है। यह खेल से सम्बन्धित सहज नैसर्गिक प्रवृति, अभिव्यक्ति का साधन एवं बच्चों की अत्यधिक उर्जा को उपयोग में लाने के सिद्धान्तों को बतलाता है। इसके मुताबिक़ बच्चों को खेल का मज़ा लेने और मौज़-मस्ती की आज़ादी होनी चाहिए और इस दौरान जीत-हार का महत्त्व नहीं होना चाहिए। इसके माध्यम से लेखक सुझाते हैं कि यदि शिक्षा प्रणाली में खेलों को एकीकृत कर दिया जाए तो बच्चों को बेहतर इन्‍सान बनने में मदद होगी।

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