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स्‍कूल तेरे कितने नाम

मेंहदले, अर्चना

FormatEbook
Published2016
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
इस लेख में लेखकद्वय बताते हैं कि बैंगलूरु में एक अध्ययन के दौरान उन्होंने पाया कि लगभग सभी छोटे-बड़े स्कूल अपने नामकरण में राजनीतिक तरीक़ों (जाने-माने नामों या जुमलों) का इस्तेमाल करते हैं। यह रणनीति वास्तविकता से ऊपर उठकर स्कूलों को तथाकथित ब्राण्ड आइडेंटिटी प्रदान करती है जो कि अभिभावकों और समाज को भ्रमित करती है। वे सुझाते हैं कि भारत में निजी और सार्वजनिक स्कूलों को इस बारे में भी चिन्तन करना चाहिए कि स्कूल का नाम भले कुछ भी हो, क्या वे शिक्षा के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए भी कार्य कर रहे हैं।

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