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सोचने की बात

भल्ला, गीता

FormatEbook
Published2014
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy $1
About this book
लेख बच्चों, विशेषकर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के आकलन और समझ के लिए अधिक दयालु और सूक्ष्म दृष्टिकोण की आवश्यकता पर ज़ोर देता है। इसके अन्तर्गत बच्चों, विशेषकर विकलांग बच्चों को निष्पक्ष और समग्र तरीक़े से देखने और समझने के महत्त्व पर ज़ोर दिया गया है। लेखिका सुझाती हैं कि आकलन यांत्रिक या अवैयक्तिक नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें बच्चे के प्रति प्रेमपूर्ण रुचि शामिल होनी चाहिए। लेखिका ने केवल आकलन के आधार पर निष्कर्ष पर पहुँचने के प्रति आगाह करने के साथ-साथ बच्चों को केवल उनकी विकलांगताओं के आधार पर वर्गीकृत करने के सम्भावित ख़तरों पर प्रकाश डाला है।

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