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निर्बलों के लिए भेदभाव

साईनाथ, पी.

FormatEbook
Published2008
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
लेखक इस लेख में एक नई परिघटना का ज़िक्र करते हैं, जिसमें उच्च जातियाँ निम्‍न जातियों पर जातिवादी होने का उल्टा आरोप लगाते हुए ख़ुद को भेदभाव का शिकार बता रही हैं। एक ताज़ी रिपोर्ट के हवाले से वे बताते हैं कि वॉल स्ट्रीट जरनल भी उच्च जातियों के समर्थन में विपरीत भेदभाव की बात कर रहा है। इसका विरोध करते हुए लेखक बताते हैं कि स्कूल, कॉलेज से लेकर तमाम क्षेत्रों में दलितों को भेदभाव का सामना करना पड़ता है। ब्राह्मणों सहित अन्य उच्च जातियाँ अपनी-अपनी जाति सभाएँ करती हैं इसके बावजूद यदि दलित ऐसा कोई आयोजन करते हैं तो उन पर जातिवादी होने का उल्टा आरोप लगाया जाता है।

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