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भेजे में भाषा का उपकरण? मामला संगीन है

जयसील्वन, ए.के.

FormatEbook
Published2009
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy $1
About this book
लेख विद्या भवन सोसायटी द्वारा अप्रैल 2004 में आयोजित ‘ज्ञान का निर्माण’ सेमीनार में लेखक द्वारा दिए गए वक्तव्य को प्रस्तुत करता है। अपने वक्तव्य में वक्ता मानव भाषा की प्रकृति से सम्बन्धित चौम्स्की के भाषा वैज्ञानिक विचारों की पृष्ठभूमि को सन्दर्भित करते हैं और भाषा अर्जन यंत्र के काम करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाते हैं। साथ ही वे यह भी रेखांकित करते हैं कि भाषा सीखने के लिए मानव मस्तिष्क की भूमिका और सार्वभौमिक व्याकरण की महत्ता को नज़रअन्दाज़ नहीं किया जा सकता है और बच्चों के भाषा सीखने के लिए उन्हें अनुकूल माहौल और सार्थक संवाद के भरपूर मौक़े देना बेहद ज़रूरी है।

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