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जब कला कलाकर बन जाती है..

कल्याण, श्रीवि

FormatEbook
Published2013
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
लेख, कला असल में है क्या व कला की परिभाषाओं की व्यापकता पर विचार करता है। यह शिक्षा, समाज व प्रकृति में मौजूद कला के विभिन्न स्वरूपों पर विमर्श करता है। यह स्वत्व को विस्तारित करने के बारे में विचार प्रस्तुत करता है। साथ ही सीखने-सिखाने में स्वत्व के चार स्वरूपों के महत्त्व की भी चर्चा करता है व इसके माध्यम से विद्यार्थियों को कला सिखाने के पीछे की समझ को खोलता है।

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