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दलित आन्दोलन के लिए गाँधी - आम्बेडकर बहस के सबक़
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About this book
प्रस्तुत आलेख दलितों का शोषण और मुक्ति, जाति-व्यवस्था या जातिगत पूर्वाग्रहों का सामना करने, दलित आन्दोलन की अपेक्षित सफ़लता न मिलने के कारणों से निपटने के लिए रणनीतिक और व्यावहारिक सूत्रों की तलाश करता है। इस सन्दर्भ में गाँधी और आम्बेडकर के विचारों और तौर-तरीक़ों को लेकर विभिन्न विद्वानों के बीच व्याप्त भिन्नता को उजागर करने की कोशिश लेखक ने की है। लेखक गाँधी-आम्बेडकर के विचारों के संयुक्त अध्ययन को मौजूदा वक़्त की ज़रूरत बताते हुए दोनों को एक ही दायरे में समाहित करता है। यह भविष्य की वर्तमान में तैयारी के लिए लिखा गया रणनीतिक लेख है।