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राष्ट्रवाद पर बहस : लोकतांत्रिक संवाद का संकट

कौशिक, आशा

FormatEbook
Published2016
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख राष्ट्रवाद की कई व्याख्याओं और देश-काल-परिस्थिति में बदलते इसके राजनीतिक प्रयोगों की लोकतांत्रिक मूल्यों के आलोक में चर्चा करता है। आज हमारे देश में राष्ट्रवाद एक मुख्यधारा की बहस और लोकतांत्रिक दमन का हथियार बना दिया गया है। राजनीतिक बहस से हटकर लेखक ने यहाँ राष्ट्रवाद क्या है और आम लोगों को इससे किस हद तक सरोकार रखना चाहिए? भारत और भारतीय राष्ट्रवाद का विचार कोई संक्षिप्त आख्यान नहीं है जैसे मुद्दों पर चर्चा की है। लेखक राष्ट्रवाद को एक बहुआयामी और गतिशील प्रवाह के रूप में देखते हुए उसके निरन्तर एवं परिवर्तनशील रूप को अपनाने की सलाह देते हैं।

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