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बलात्कार

ग्रीयर, जर्मेन

FormatEbook
Published2006
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख बलात्कार की अवधारणा और उसके बाद अपराध सिद्ध करने की मौजूदा प्रक्रियाओं में निहित मर्दवादी धागों की खोज करता है। लेखिका के अनुसार बलात्कार की अवधारणा तो समस्याग्रस्त है ही और साथ ही बलात्कार के प्रति राज्य और क़ानून का रवैया भी पितृसत्तात्मक है। वर्तमान समाज बलात्कारियों के लिए सख़्त-से-सख्‍़त सज़ा माँगता है, लेकिन लेखिका इसके ठीक विपरीत सोच रखती है और उसके विस्तार से क़ानूनी कारण भी यहाँ बताती हैं। इस रूप में यह लेख कई बुनियादी धारणाओं पर फिर से विचार करने के लिए प्रेरित करता है।

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