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मंंत्र , हवाबाज़ी और धुन्ध

रामपाल, अनिता

FormatEbook
Published1996
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
हवा जैसी अमूर्त अवधारणा को तीसरी-चौथी में पढ़ाने लगना कितना सही है? उस उम्र में रटे हुए वाक्यों से बच्चों की क्या समझ बनती है? क्या बच्चों की उम्र और उनकी समझ पाने की क्षमता में कोई सम्बन्ध है? ऐसे सवालों को लेकर विभिन्न कक्षाओं में बच्चों के साथ की गई बातचीत का विश्लेषण इस लेख में प्रस्तुत किया गया है।

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