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कांशीराम और उत्तर-आम्बेडकर दलित-विमर्श
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About this book
यह लेख बद्री नारायण रचित कांशीराम की जीवनी को केन्द्र में रख कर लिखा गया है। उत्तर-औपनिवेशिक भारत में दलित-चेतना की निर्मित और सत्ता में दलित-राजनीति के हस्तक्षेप के मामले में कांशीराम के विचारों और राजनीतिक प्रयोगों का अतुलनीय योगदान है। लेखक ने इस जीवनी पर टिप्पणी के बहाने कांशीराम के असाधारण जीवन का एक संक्षिप्त विवरण कुछ इस तरह से पेश करने की कोशिश की है कि उनके और बाबासाहेब आम्बेडकर के विचारों के बीच समानता और अन्तर रेखांकित हो सके। इसके बाद आलोचनात्मक निगाह के साथ कांशीराम की राजनीति पर चर्चा करते हुए उनके और बसपा के साथ ही समसामयिक दलित राजनीति पर होने वाली बौद्धिक विमर्श की संक्षिप्त समीक्षा की गई है।