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कितना गहरा और खोदें

रॉय, अरुन्धती

FormatEbook
Published2005
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
लेख एक ओर पोटा जैसे कानूनों और 1984 तथा गोधरा जैसे प्रसंगों के ज़रिये नागरिक अधिकारों के हनन और इन प्रसंगों में असमान व्यवहार पर चर्चा करता है; तो दूसरी ओर बढ़ती आर्थिक असमानता के बीच बहुराष्ट्रीय बाज़ार तथा कॉर्पोरेट्स के बढ़ते दखल और अनैतिकता की हद तक बढ़ती मीडिया की स्वतंत्रता पर चिन्ता ज़ाहिर करता है। इन समस्याओं को राजनीतिक अवसरवाद से जोड़ते हुए लेख बिखरे हुए क्षेत्रीय आन्दोलनों को साथ लाकर राजनीति को पुनर्परिभाषित करने की ज़रुरत पर ज़ोर देता है।

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