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संविधान का मसौदा

बी.आर., अंबेडकर

FormatEbook
Published1949
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
डॉ बी आर अम्बेडकर ने इस भाषण में उन आरोपों का खण्‍डन किया कि संविधान सभा ने संविधान निर्माण में बहुत समय लगाया और यह भारत के लिए अनुपयुक्त था। उन्होंने संविधान में बताई गई वैचारिक समस्याओं और अत्यधिक केन्द्रीयकरण की प्रवृतियाँ को अनुचित बताया। उन्होंने सदस्यों को सावधान किया कि स्वतंत्रता और संसदात्मक लोकतंत्र को देश के अन्‍दरूनी ख़तरों से बचाना है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि राजनीतिक लोकतंत्र की रक्षा हेतु सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र को बढ़ावा देना अनिवार्य है। इस भाषण में उन्होंने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के त्रित्व के महत्त्व को भी रेखांकित किया।

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