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रोज़मर्रा जीवन में सौन्दर्यानुभूति

भट्टाचार्जी, तरित

FormatEbook
Published2013
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
लेख ग्रामीण जीवन के आलोक में मनुष्य की विकास यात्रा और सौन्दर्यानुभूति पर विचार प्रस्तुत करता है। इसके द्वारा लेखक कला-सौन्दर्य के बुनियादी संसाधन के रूप में आस-पास उपलब्ध रोज़मर्रा की सामग्री और उसके उपयोगी महत्त्व के बारे में चर्चा करते हैं। वे इंगित करते हैं कि सौन्दर्यानुभूति मूल रूप से शिक्षा में हमारे रचनात्मक पालन-पोषण का एक अभिन्न अंग है।

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