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बंजारा समाज : सभ्य नागरिक से अपराधी जाति की ओर

सिंह, जितेन्द्र

FormatEbook
Published2019
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
इस आलेख में बुन्देलखण्ड क्षेत्र की कबूतरा जनजाति का अध्ययन प्रस्तुत किया गया है, जो राज्य द्वारा बनाई गई किसी भी श्रेणी में नामांकित नहीं है। यह जनजाति हड़प्पा सभ्यता से मध्य काल तक आजीविका के लिए व्यापारियों के रूप में आत्मनिर्भर बंजारा समुदाय अँग्रेज़ी साम्राज्य में लुटेरे पूँजीवाद का शिकार हो गई। औपनिवेशिक काल में इस जनजाति को आपराधिक जनजातियों के रूप में वर्गीकृत किया गया, जिससे इनके जीवन का ख़ानाबदोश तरीक़ा ही ख़तरे में आ गया। लेख में स्वतंत्र भारत में इस जनजाति द्वारा भोगे जा रहे अलगाव, अपमान और सामाजिक उपेक्षा के सम्बन्ध में चर्चा की गई है।

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