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दलित नैतिकता बनाम वर्चस्ववादी

वाल्मीकि, ओमप्रकाश

FormatEbook
Published2005
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
लेख भारतीय समाज में दो सामानान्तर नैतिकताओं की मौजूदगी की बात करता है। एक है उच्चजातीय धार्मिक नैतिकता जो वर्णव्यवस्था की समर्थक है और दूसरी उदारवादी नैतिकता जो वर्णाश्रम विरोधी और संविधान की पक्षधर है; दूसरी नैतिकता का सम्बन्ध वंचित तबकों से है जहाँ व्यक्ति चेतना की अपेक्षा सामूहिक चेतना ज़्यादा महत्त्वपूर्ण होती है, जिसे लेखक दलित आत्मकथाओं की विशेषता बताता है। इस तरह लेख साहित्यिक और समाजशास्त्रीय नज़रियों को एक-साथ प्रयुक्त करता है।

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