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रोज़गार

द्रेज़, यों

FormatEbook
Published1997
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
रोज़गार पेट पालने का महत्त्वपूर्ण साधन है। बेरोज़गारी से बहुत-सी सामाजिक समस्याएँ पैदा होती हैं। शिक्षा ऐसी ‘मानव-पूंँजी’ है जिससे व्यक्ति को स्व–रोज़गार के ही नहीं, नौकरी पाने के भी बेहतर और ज़्यादा मौके़ मिलते हैं। भारत में बहुत-से लोगों के पास अच्छी तनख़्वाह वाली नौकरी पाने हेतु ज़रूरी शिक्षा, कौशल या पहुँच नहीं होती क्योंकि शिक्षा व हुनर पाने के मौक़े सबको समान रूप से नहीं मिलते और एक जैसी शिक्षा या निपुणता होने के बावजूद अच्छी नौकरी पाने के अवसर अलग-अलग सामाजिक या आर्थिक पृष्ठभूमि से आए लोगों के लिए अलग-अलग होते हैं।

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