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रोशनी और मुर्गी का अण्डा

मित्रा, स्‍निग्धा

FormatEbook
Published1997
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
मुर्गियों की अण्डा उत्पादन क्षमता अच्छी नस्ल, बेहतर आहार और अनुकूल वातावरण पर निर्भर है। मुर्गी की उम्र जब लगभग बीस सप्‍ताह की होती है तब से वह अण्डे डालने लगती है। अण्डे के उत्पादन को बढ़ाने के लिए मुर्गियों को प्रतिदिन 16 घण्टे रोशनी में रखा जाता है ताकि वह प्रतिदिन एक अण्डा दे सके। मुर्गी की आँख के रेटिना पर गिरने वाले प्रकाश से उसकी पीयूष ग्रन्थि ल्‍यूटिनाइजि़ंग हार्मोन स्रावित करती है जो डिम्बोत्‍सर्जन में सहायक है। शाकाहारी अण्डा यानी अनिषेचित अण्डा जिससे चूज़ा नहीं बनता। अगर निषेचन न भी हो तो भी अण्डाणु अपना सफ़र पूरा करता है व अनिषेचित अण्डे के रूप में मुर्गी के शरीर से बाहर आता है।

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