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सिंहासन खाली करो कि जनता आती है...

सुधीर, वेददान

FormatEbook
Published2005
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
सामाजिक परिवर्तन की धीमी गति पर बात करते हुए यह लेख इसके लिए ज़िम्मेदार कारकों की खोज करता है। सामाजिक जड़ता, जातिगत उत्पीड़न, पुंसवाद के अब भी बने रहने की बात करते हुए लेख ग़रीब स्त्रियों की समस्याओं का ज़िक्र करता है, उच्च वर्गीय स्त्रियों को लेखक ग़रीब स्त्रियों से पूर्णतः अलगा कर देखता है। लेखक का विश्‍वास है कि वंचित तबका इस धीमे परिवर्तन का बहुत इन्तजार नहीं कर पायेगा।

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