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भारत में जाति प्रथा : उसकी संरचना, उत्पत्ति और विकास

अम्बेडकर, बी.आर.

FormatEbook
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह 1917 में प्रकाशित डॉ. अम्बेडकर का जाति व्यवस्था की प्रकृति और उत्पत्ति पर आलेख है। इसमें वे यह सवाल उठाते हैं कि कैसे सांस्कृतिक रूप से एकरूप हिन्दू समाज अनगिनत जातियों में बँटा हो सकता है जो सगोत्र विवाह द्वारा एक-दूसरे में विलय से रोके गए हैं। उनका तर्क है कि बहिर्विवाह अधिकांश भारतीय परिवारों का प्राकृतिक गुण है। वे सवाल उठाते हैं कि कैसे ऐसे समाज में सगोत्र विवाह का नियम थोपा गया होगा। वे दर्शाते हैं कि किस तरह महिलाओं के उत्पीड़न के बिना सगोत्र विवाह और जाति व्यवस्था को बनाए नहीं रखा जा सकता था। यह तर्क देते हुए कि किलेबन्‍द वर्ग ही जाति है, वे इस बात पर विचार करते हैं कि किन परिस्थितियों में सभी समाजों ने इसे स्वीकारा होगा।

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