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बच्चे महज़ बच्चे नहीं

नवानी, दिशा

FormatEbook
Published1996
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
दिल्ली के एक पब्लिक स्कूल में बच्चों के बीच बैठकर उनके अनुभवों को समझने की एक कोशिश इस आलेख में की गई है। बहुतेरे शिक्षक बच्चों को छोटी-छोटी बात पर डाँट लगाते हैं। शिक्षकों द्वारा बच्चों का मज़ाक उड़ाना, डराना, चुप कराना, टोकना आदि लगातार जारी रहता है। ऐसे में शिक्षक और बच्चों के बीच में स्वाभाविक रूप से एक दूरी बन जाती है। साथ ही बच्चों को कुछ बोलने के पहले या अपनी बात रखने के पहले ही एक भय का सामना करना पड़ता है। इसी विषय पर इस लेख में प्रकाश डालने की कोशिश की गई है।

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