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राजनीति में भाषा का खेल

चमड़िया, अनिल

FormatEbook
Published2001
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
सत्ता हमेशा अपने नापाक इरादों को ढकने के लिए भाषा का खेल रचती है। आज़ाद भारत में कश्मीर के नागरिकों ने राष्ट्रीय एकता और अखण्डता को धर्म के ऊपर वरीयता दी थी लेकिन आगे चलकर वहां धर्मोन्माद पनपा क्योंकि राज्य ने ख़ुद राष्ट्रीय एकता और अखण्डता को एक कट्टरवादी धर्म के रूप में थोपने की कोशिश की। आतंकवाद को धर्म से न जोड़न की अपील करते हुए भी राज्य ऐसी भाषा और कार्य शैली का इस्तेमाल करता है जो आतंकवाद को एक धर्म विशेष से जोड़ देती हैे।

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