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सामाजिक न्याय : सीखने का केन्द्र
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About this book
"लेख में, लेखिका विद्यार्थी जीवन के अनुभवों के आधार पर रेखांकित करती हैं कि हम क्या सीखते हैं, यह हम कैसे सीखते हैं, के अनुभव से गहरा जुड़ा हुआ होता है। कक्षा में एक शिक्षक अपनी भूमिका सामाजिक-राजनीतिक व्यक्ति के रूप में देख सकते हैं जो विद्यार्थियों के लिए ऐसे अवसर और जगह बनाएँ जिससे वे मौखिक और लिखित भाषा में, अन्यायपूर्ण कार्यों और वर्तमान और अतीत की अनुचित नीतियों के साथ-ही-साथ पाठों पर भी सवाल खड़ा कर पाएँ। वे इस बात पर ज़ोर देती हैं कि कक्षा में सामाजिक न्याय के विचारों एवं आलोचनात्मक उम्मीद के मूल में बच्चों को सुरक्षित रखने की मंशा ही होती है। "
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