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Cover of न्यायपालिका में भ्रष्टाचार

न्यायपालिका में भ्रष्टाचार

जैन, कमलेश

FormatEbook
Published2011
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
भ्रष्टाचार को वृहद अर्थों में लेते हुए लेख न्यायपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार की चर्चा करता है। न्यायाधीशों में बारीक़ समझ की कमी तथा ऊपरी अदालतों में जाने की लोगों की मजबूरी भी भ्रष्टाचार का ही नतीजा है। लेखक उदाहरण देते हुए बताता है कि विभिन्‍न न्यायाधीशों के ख़िलाफ़ सम्पत्ति के हेर-फेर, भाई-भतीजावाद, और ग़बन जैसे तमाम मामलों के सबूत रहे हैं। इन सबके बावजूद न्यायाधीशों को मिले अधिकारों के चलते वे अपने पद पर बने रहते हैं। इन समस्याओं से जल्दी ही छुटकारा न पाया गया तो न्यायपालिका अपना मूल्य गँवा देगी।

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